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The infographic above shares some key tips for communicating with children with disabilities.

It is important to nurture the communication skills of children as they grow so that they can express themselves. Both verbal and non-verbal means represent some of the ways of communication. It is important to ensure that the intervention happens at home. Please make sure that learning process of your child is not limited to teachings gathered at school or therapy centre.

The key tips for communicating with children with disabilities includes gaining children attention, checking one’s own language and spending time to play with children every day. Play is an opportunity to stimulate and build your child’s language skills. The way a child plays is also a strong indicator of their progress. Find out other tips for better communication in the infographic above.

Also, watch Lavanya talk about her journey with her son Kedar who was diagnosed with Autism. Lavanya talks about the importance of building communication skills in your child.

Acknowledgement: We extend our heartful thanks to our parent champion, Triveni Goswami and her organization, The Autism Niche . We would also like to thank Tabitha Wolfe, they helped us in building the content. 

If you have questions about Autism, Down Syndrome, ADHD, or other intellectual disabilities, or have concerns about developmental delays in a child, the Nayi Disha team is here to help. So, for any questions or queries, please contact our FREE Helpline at 844-844-8996. You can either call or what’s app us.

DISCLAIMER: Please note that this guide is for information purposes only. 

कम्युनिकेशन स्किल—  प्रस्तुत चार्ट में विकलांग बच्चों को अपनी बातें एक दूसरे को पहुंचाने के कौशल की क्षमता का विकास करने के कुछ उपाय बताए गए हैं। जैसे- जैसे बच्चे बड़े होते हैं उनमें संचार के कौशल को विकसित करना महत्वपूर्ण होता है, ताकि वें अपने आप को व्यक्त कर सकें, चाहे फिर माध्यम कोई भी हो। बोलकर या इशारों से वह खुद को किसी भी तरह अभिव्यक्त कर सकें या संवाद कर सकें। कृपया आप इस तरफ ध्यान दें कि सीखने की प्रक्रिया सिर्फ विद्यालय थेरेपी सेंटर तक ही सीमित नहीं है यह कार्य घर में भी उतना ही जरूरी है।  विकलांग बच्चों के संवाद के लिए जो महत्वपूर्ण बिंदु है उसमें उनका ध्यान अपनी तरफ खींचना, अपनी योग्य भाषा का चयन करना और रोज उनके साथ खेलने का समय निकालना जरूरी है। बच्चे के भाषा कौशल के लिए खेल एक अवसर है, जो उन्हें बोलने के लिए प्रेरित करता है। जिस तरह से बच्चा खेलता है वह भी एक संकेत है उसकी प्रगति का। और बिंदु जानने के लिए चार्ट की सहायता लें जिसमें बेहतर संवाद के बारे में बताया गया है।  लावण्या ने अपने बच्चे केदार के बारे में तथा उसके साथ का ऑटिज्म का सफर कैसा रहा इस बारे में वीडियो में बताया है। उसे देखें।    आभार— हम दिल से आभार मानते हैं हमारे चैंपियन अभिभावक त्रिवेणी गोस्वामी और उसकी संस्था का ऑटिज्म नाइच का, ताबिया वूल्फ के भी शुक्रगुजार हैं जिन्होंने हमें विषय वस्तु को बनाने में मदद की। एक्नॉलेजमेंट(स्वीकृति): हम अपने पैरेंट चैंपियन, Tabitha Wolfe , त्रिवेणी गोस्वामी और उनके संगठन, The Autism Niche को दिल से धन्यवाद देते हैं। उन्होंने सामग्री तैयार करने में हमारी मदद की। यदि आपके पास ऑटिज्म डाउन सिंड्रोम ए डी एच डी या अन्य बौद्धिक क्षमताओं के बारे में प्रश्न या किसी बच्चे के विकास में देरी के बारे में चिंता है तो नई दिशा टीम मदद के लिए यहां है . किसी भी प्रश्न पूछताछ के लिए कृपया हमारी मुफ्त हेल्पलाइन- 844-844-8996 पर हमें कॉल या व्हाट्सएप कर सकते है। हमारे परामर्शदाता अंग्रेजी ,हिंदी ,मलयालम, गुजराती, मराठी, तेलुगू और बंगाली सहित विभिन्न भाषाएं बोलते हैं.   सूचना: कृपया ध्यान दें कि यह गाइड (मार्गदर्शिका) सिर्फ जानकारी देने के मकसद से बनाई गई है।
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