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श्री जे. एम. गौर, दो ऑटिस्टिक बच्चों के पिता, भोपाल, मध्य प्रदेश

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अंजना उ

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महत्वपूर्ण जानकारी

ट्रेनर ने हमें यह महसूस करने में मदद की कि हमारे बच्चे किन परिस्थितियों से गुजरते हैं। उलझन, यह समझ न आना कि क्या करें या कैसे प्रतिक्रिया दें, और चिंता। उन्होंने हमसे कहा, “आपका बच्चा हर दिन ऐसा ही महसूस करता है।” उस पल ने मेरे लिए सब कुछ बदल दिया। मैं रो पड़ा। मुझे समझ आया कि मेरा बेटा जानबूझकर बात नहीं मान रहा था। वह बस हमारी दुनिया को समझने की कोशिश कर रहा था।

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